चमोली, उत्तराखंड।
उत्तराखंड की सबसे प्राचीन और पवित्र धार्मिक यात्राओं में शामिल नंदा देवी राजजात यात्रा अब वर्ष 2026 में आयोजित नहीं होगी। राजजात समिति ने यह निर्णय लिया है कि यह ऐतिहासिक यात्रा अब वर्ष 2027 में निकाली जाएगी। पहले यह यात्रा अगस्त–सितंबर 2026 में प्रस्तावित थी, लेकिन हिमालयी मार्गों पर संभावित बर्फबारी, मौसम संबंधी जोखिम और आपदा की आशंका को देखते हुए इसे एक वर्ष आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है।
राजजात समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर ने बताया कि यह निर्णय समिति के सभी सदस्यों की सहमति से लिया गया है। उनके अनुसार, यात्रा के मार्ग अत्यंत कठिन हैं और हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयारियों का समय पर पूरा न हो पाना भी इस फैसले का एक प्रमुख कारण रहा। समिति का कहना है कि किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के बजाय यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करना प्राथमिकता है।
नंदा देवी राजजात को उत्तराखंड की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। इसे ‘हिमालय का महाकुंभ’ भी कहा जाता है। यह यात्रा चमोली जिले के नौटी गांव से प्रारंभ होकर लगभग 280 किलोमीटर की कठिन पैदल दूरी तय करते हुए होमकुंड तक पहुंचती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार चार सींग वाली खाड़ू भेड़, जिसे चौसिंगा भेड़ भी कहा जाता है, देवी नंदा का प्रतीक मानी जाती है और उसी के माध्यम से यात्रा का समय तय होने की परंपरा चली आ रही है।
यात्रा को एक वर्ष आगे बढ़ाने के निर्णय के बाद इसे लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस फैसले को आवश्यक और सुरक्षा की दृष्टि से सही बता रहे हैं, जबकि कई श्रद्धालु इसे परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं और मानते हैं कि राजजात का आयोजन सदैव धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुरूप ही होता रहा है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बारह वर्षों का अंतराल हमेशा सख्ती से तय नहीं रहा है और परिस्थितियों के अनुसार यात्रा पहले भी आयोजित होती रही है।
राजजात समिति ने स्पष्ट किया है कि यात्रा की अंतिम तिथि और पूरा कार्यक्रम 23 जनवरी 2026 को नौटी गांव में आयोजित होने वाले मनौती समारोह के दौरान घोषित किया जाएगा। तब तक श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को यात्रा से जुड़े सभी आधिकारिक निर्णयों का इंतजार रहेगा।
