नंदा देवी यात्रा को लेकर दो समितियों के दावों के बीच 2026 की बड़ी जात पर लगी मुहर
चमोली।
मां नंदा देवी की ऐतिहासिक यात्रा को लेकर इस वर्ष स्थिति स्पष्ट होती नजर आ रही है। जहां एक ओर नंदा देवी महोत्सव के दौरान एक समिति की ओर से वर्ष 2027 में नंदा राजजात निकालने की घोषणा की गई थी, वहीं कुरुड़ से निकलने वाली यात्रा समिति ने इस वर्ष 2026 में ही मां नंदा की यात्रा ‘बड़ी जात’ के नाम से निकालने का निर्णय लिया है।
वसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को नंदानगर स्थित मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में आयोजित दिनपट्टा कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट कर दिया गया कि मां नंदा की बड़ी जात इसी वर्ष 2026 में 5 सितंबर से प्रारंभ होगी और 20 सितंबर को होमकुंड में संपन्न होगी। दिनपट्टा कार्यक्रम में गौड़ ब्राह्मणों, 14 सयानों और बधाण, दशोली व बंड क्षेत्र के हकहकूकधारी गांवों की उपस्थिति में यात्रा तिथियों की औपचारिक घोषणा की गई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के दौरान मां नंदा मुख्य अवतारी पुरुष पर अवतरित हुईं और इसी वर्ष कैलाश जाने की इच्छा जताई। इसके बाद गौड़ ब्राह्मणों ने परंपरागत रीति से बड़ी जात के आयोजन की तिथि तय की। यात्रा समिति की ओर से 21 दिन का यात्रा कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया है।
यात्रा समिति के अनुसार, 5 सितंबर को मां नंदा की डोलियां कुरुड़ मंदिर से दशोली, बधाण और बंड क्षेत्र होते हुए कैलाश की ओर प्रस्थान करेंगी। यात्रा का समापन 20 सितंबर को होमकुंड में होगा। तिथि घोषित होते ही क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया। विभिन्न गांवों से पहुंची महिला मंगल दलों ने मांगल गीत गाए, जबकि लोक गायक दर्शन फरस्वाण ने धार्मिक गीतों की प्रस्तुतियां दीं।
बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल (सेनि) हरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मां नंदा की इच्छा के अनुरूप इस वर्ष बड़ी जात का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयंसेवकों को तैयारियों में लगाया जाएगा। उन्होंने सरकार से यात्रा पड़ावों पर मूलभूत सुविधाओं के विकास की मांग भी की, क्योंकि अभी कई स्थानों पर सुधारात्मक कार्य शेष हैं।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष यात्रा को ‘राजजात’ के स्थान पर ‘बड़ी जात’ नाम दिया गया है, जबकि यात्रा के पड़ाव परंपरागत रूप से पूर्ववत ही रहेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में जात के आयोजन को लेकर एक माह तक धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह बना रहता है, जिसमें श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था ग्रामीण स्वयं करते हैं।
नंदा देवी यात्रा को लेकर सामने आए दो अलग-अलग दावों के बीच अब 2026 की बड़ी जात को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ होती दिख रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस ऐतिहासिक यात्रा को लेकर किस तरह की तैयारियां करती है।
